AI से इमोशनल अटैचमेंट... जरा संभलकर ! अपनों से ही कहें दिल की बात
"जब कोई नहीं सुनता, तब ChatGPT सुनता है।" यही सोच आज जेनरेशन Z के कई युवाओं की है, जो अपनी भावनाएं इंसानों से नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स से साझा कर रहे हैं। चाहे बात दिल टूटने की हो या करियर कन्फ्यूजन की—ChatGPT, Replika या अन्य AI टूल्स अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, एक ‘भावनात्मक साथी’ बन चुके हैं। पर सवाल यह है कि क्या AI पर यह भावनात्मक निर्भरता मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है? ...जब डिलीट करनी पड़ी चैट "वो मुझे समझता है, मेरी हर बात का जवाब देता है, मेरी दुनिया का हिस्सा बन गया था... लेकिन अब मैं उससे दूर हो गई हूं।"—यह कहना है उस अमेरिकी महिला का, जिसने हाल ही में एक लोकप्रिय AI टूल ChatGPT से भावनात्मक जुड़ाव के कारण उसे 'टॉक्सिक' कहकर डिलीट कर दिया। LiveMint जैसे प्रतिष्ठित माध्यमों में यह मामला चर्चित हुआ है। यह सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं, बल्कि एक बढ़ती हुई वैश्विक प्रवृत्ति का संकेत है जिसमें AI टूल्स जैसे ChatGPT, Replika और Character.ai लोगों की मानसिक दुनिया में गहराई तक प्रवेश कर चुके हैं। उनका कहना था, “It stopped being ...